Print Icon दक्षिण मध्यवर्ती क्षेत्र
क्षेत्रफल : 2,03,000 वर्ग कि.मी.
राज्य : आंध्र प्रदेश के  भाग ( 15° अक्षांश के उत्तर में)
मुख्यालय : हैदराबाद
पता : परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय
परमाणु ऊर्जा विभाग, प.ख.नि कैम्पस,
सर्वेक्षण सं 147, नागाराम, रामपल्ली रोड,
चेर्लापल्ली, कीसारा मंडल,  हैदराबाद-500 083.
संपर्क सूत्र : क्षेत्रीय निदेशक
फोन     :     040-29708128
फैक्स    :     040-29708129
ई-मेल    :     rdscr.amd@gov.in

यह क्षेत्र सन् 1988 में दक्षिणी क्षेत्र में से कुछ भाग को लेकर स्थापित किया गया था । इसके पूर्व सभी अन्वेषण कार्य दक्षिण क्षेत्र , बेंगलूरू द्वारा किए जाते थे । प्रारंभ में दक्षिण मध्य क्षेत्र का कार्यालय हैदराबाद में एक किराए के भवन में स्थापित किया गया था, तथा 1993 से यह प.ख.नि. मुख्यालय हैदराबाद के परिसर में ही स्थित है ।

निम्नलिखित भूवैज्ञानिक प्रक्षेत्र (डोमेन) इस क्षेत्र के अधिकांश भागों को आच्छादित किए हुए हैं .

(i) आर्कियन बेसमेंट चट्टानें : इनमें हैं 1) प्रायद्वीपीय ग्रेनाइट नाइस एवं (2) पूर्वी घाट की चलायमान (मोबाइल) पट्टी, जिसमें आंध्र प्रदेश के तटवर्ती जिलों के चार्नोकाइट्स व खोडालाइट्स हैं ।

(ii) निम्नतर प्रोटेरोजोइक हरे पत्थर की शिस्ट पट्टी: जैसे नेल्लौर शिस्ट बेल्ट, वेल्लिगल्लू गडवाल शिस्ट बेल्ट, एवं रामगिरि -पेनकचेर्ला शिस्ट-बेल्ट ।

(iii) मध्य से उच्चतर प्रोटेरोजोइक चट्टानें यह चट्टानें  दो मुख्य भौगोलिक प्रक्षेत्रों में फैली हैं - नामतः

(क) कडप्पा बेसिनः तलछटी और आग्नेय कुडप्पा सुपर समूह की चट्टानों और कुरनूल सुपर समूह शामिल है।

(ख) पाखाल बेसिनः जिसमें गोदावरी बेल्ट से सटे रिफ्ट संबंधित वातावरण में निक्षेपित उच्चतर प्रोटेरोजोइक अवसादी शैल शामिल हैं ।

 इसके अतिरिक्त, कर्नाटक के क्लोसपेट ग्रेनाइट की तरह ही निम्न प्रोटेरोजोइक एवं मेफिक डाइक स्वार्म भी, बेसमेंट चट्टानों के अंदर छिपे प्लूटोन की तरह उपस्थित हैं ।

(iv) गोदावरी बेसिन से सटे क्षेत्र में गोंडवाना (मेसाजोइक) चट्टानें: यह पाखाल बेसिन की प्रोटेरोजोइक चट्टानों के ऊपर प्रसरित हैं ।

(v) तटवर्ती बालुका एवं अंतर्स्थलीय प्लेसरः यह क्वाटरनेरी ग्रुप की चट्टानों का भाग है । आंध्रप्रदेश के तटवर्ती विस्तार में कई समृद्ध बालुका खनिज डिपाजिट स्थित हैं |

इसके अलावा क्षेत्र के उत्तर पश्चिमी भाग में दक्कन ट्रैप (मेसोजोनिक काल) के कई छोटे-छोटे अनावरण भी दिखते हैं |

देश के इस भाग में 50 के दशक के प्रारंभ में रेडियोमितीय सर्वेक्षण शुरू हो गए थे । शुरुआत में अवसादी चट्टानों में शिरा-प्रकार के यूरेनियम खनिजीकरण को ढूंढने पर प्रयास केंद्रित थे । ऐसे सर्वेक्षणों के दौरान वनापूर्ति के आस-पास महबूबनगर ग्रेनाइट में भी कुछ यूरेनिफेरस उपस्थितियां ढूंढी गयीं ।

तथापि 1990 के दशक में, यूरेनियम खनिजीकरण के बारे में बदली विचारधारा के अनुरूप किए गए प्रयासों के फलस्वरूप उर्वर महबूबनगर ग्रेनाइट के विषम-विन्यास के निकट तथा कडप्पा बेसिन के उत्तरी भाग में श्रीशैलम / बंगनपल्ली क्वार्टजाइट में विषम-विन्यास से संबंधित यूरेनियम खनिजीकरण की खोज की जा सकी । उसके बाद बोरहोल ड्रिलिंग सहित गहन जांचों के बाद निम्नलिखित महत्वपूर्ण डिपॉजिटों को निरूपित किया जा सका :-

(1) लांबापुरः यह हैदराबाद से 140 कि.मी. दक्षिण पूर्व में आंध्रप्रदेश के नलगोंडा जिले में स्थित है । खनिजीकरण को 1.8 कि.मी.X 0.7. कि.मी. के क्षेत्र में स्थापित कर लिया गया है , तथा यह खनिजीकरण श्रीशैलम क्वार्टजाइट एवं बेसमेंट ग्रेनाइट के सहचर्य में, उनके बीच विद्यमान विषम-विन्यास के निकट पाया गया है । यह एक सपाट बिछा हुआ डिपॉजिट है , जिसकी सीधी गहराई 45 मी. है ।

(2) पेद्दागट्टु : यह लाबांपुर डिपॉजिट के काफी निकट स्थित है । पेद्दागट्टु का यूरेनियम खनिजीकरण भी एकदम उसी भूवैज्ञानिक विन्यास (सेट-अप) में है और 4.5. कि.मी. X 1 कि.मी. क्षेत्रफल में फैला हुआ है । खनिजीकरण की पूरी उपस्थिति 60 मी. सीधी गहराई में स्थित है ।

अन्वेषणों के वर्तमान मुख्य लक्ष्य-क्षेत्र

विषम विन्यास से संबंधित डिपॉजिट की खोज से उत्साहित हो कर, इसी प्रकार के भूवैज्ञानिक स्थितियों (इनविरॉन) में इसी प्रकार की उपस्थितियों को ढूंढ़ने के लिए रेडियोमितीय सर्वेक्षण किए जा रहे हैं । कुछ विशेष लक्ष्य क्षेत्रों का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है :

(i) श्रीशैलम पालनाडु बेसिनः पहले ही स्थापित की जा चुकी डिपॉजिटों के अलावा, श्रीशैलम पालनाडु बेसिनों में श्रीशैलम और वंगनपल्ली क्वार्टजाइट उपस्थितियों की कई आउटलियर्स हैं, जो सीधे बेसमेंट ग्रेनाइट के ऊपर पसरी हुई हैं । चूंकि उनके बीच के विषम-विन्यास को यूरेनियम खनिजीकरण की संभावित जगह के रूप में सिद्ध किया जा चुका है, इसलिए कई स्थलों पर रेडियोमितीय एवं अन्वेषकीय ड्रिलिंग जारी है; जैसे गुंटूर जिले में कोप्पुनूरु, नलगोंडा जिले में आर.वी. टांडा आदि । चित्रियाल भी एक अन्य महत्वपूर्ण जगह है । यह आंध्र प्रदेश के नलगोंडा जिले में हैदराबाद से लगभग 130 कि.मी. दक्षिणपूर्व में स्थित है । यहां का खनिजीकरण बेसमेंट ग्रेनाइट एवं श्रीशैलम क्वार्टजाइट के बीच के विषम-विन्यास में केंद्रित है । रेडियोसक्रियता 50 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में फैली हुई है । यहां अभी अन्वेषणात्मक ड्रिलिंग की जानी है ।

(ii) कूर्नूल बेसिनः ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर ली गयी है, जहां कुर्नूल सुपर ग्रुप की चट्टानें, नल्लामलाई वलय-पट्टी की चट्टानों के ऊपर एक स्पष्ट कोणीय विषम विन्यास बनाते हुए प्रसरित हैं । पहले किये गये भूरासायनिक सर्वेक्षणों में से कुछ में रुद्रावरम लाइन से सटे क्षेत्र में जलीय भूरासायनिक विसंगतियां निरूपित हुई हैं (नल्लामलाई वलय-ग्रुप एवं कुर्नूल सुपर ग्रुप चट्टानों के बीच का कांटैक्ट) । विषम विन्यास की सतह के समीप गहरे स्तरों में खनिजीकरण की उपस्थिति की संभावना है ।

(iii) पाखाल बेसिनः
आंध्र प्रदेश के खम्मम एवं वरंगल जिलों में ऐसे दिलचस्प भूवैज्ञानिक विन्यास (सेट-अप) विद्यमान हैं, जहां प्रोटेरोजोइक पाखाल ग्रुप की चट्टानें रिफ्ट संबंधी स्थितियों (गोदावरी रिफ्ट) में बेसमेंट ग्रेनाइट के ऊपर इकट्ठी हो गयी हैं । इन प्रोटेरोजोइक सुपरक्रस्टल के ऊपर गोंडवाना अवसाद बिछे हुए हैं । संभावित विषमविन्यास संबंधी यूरेनियम खनिजीकरण को ढूंढने के लिए इन जगहों पर रेडियोमि्तीय सर्वेक्षण किए जा रहे हैं ।

प.ख.नि. मुख्यालय हैदराबाद में स्थित विभिन्न प्रयोगशालाओं द्वारा प्रयोगशाला संबंधी समस्त सहायक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं ।